

मुख्यमंत्री के उद्घाटन के बाद ही लैलूंगा में जुए की महफ़िल!
श्री श्री रामचंडी मंदिर प्रांगण के पास खुलेआम फड़ — पुलिस मौन या साझेदार?
लैलूंगा/रायगढ़। एक तरफ़ छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय शनिवार को लैलूंगा के झगरपुर श्री श्री रामचंडी मंदिर में भव्य प्राण-प्रतिष्ठा कार्यक्रम कर धर्म और संस्कृति की अलख जगा रहे थे, वहीं दूसरी ही रात उसी पवित्र भूमि पर जुए की फड़ सजने से पूरा इलाका सन्न रह गया। धार्मिक कार्यक्रम की पवित्रता को तार-तार करती इस घटना ने प्रशासनिक जिम्मेदारी और पुलिस की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सूत्रों के मुताबिक, रविवार देर रात झगरपुर मंदिर प्रांगण के समीप आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम और नाटक के दौरान, मंच के पीछे खाली जगह पर खुलेआम जुए की फड़ चल रही थी। वहां स्थानीय ग्रामीणों से लेकर नाबालिग बच्चे तक पैसे लगाते दिखे। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि मौके पर हेड कॉन्स्टेबल नंदू पैकरा और एएसआई हेमंत कश्यप खुद मौजूद थे — और चौंकाने वाली बात यह कि वे जुआ रोकने के बजाय खुद खेल का हिस्सा बन गए।
ग्रामीणों का कहना है कि यह पूरा खेल पुलिस संरक्षण में चल रहा था। एक ग्रामीण ने गुस्से में कहा —
मुख्यमंत्री मंदिर का उद्घाटन करने आते हैं और उसी गांव में पुलिस की मौजूदगी में जुआ खेला जाता है! यह प्रशासन की नाकामी नहीं, बल्कि मिलीभगत का नमूना है।”
लोगों का आरोप है कि लैलूंगा थाना क्षेत्र में कुछ पुलिसकर्मी बाकायदा कमीशन लेकर जुआ संचालकों को खुली छूट दे रहे हैं। बताया जा रहा है कि यह फड़ थाना मुख्यालय से महज़ कुछ ही दूरी पर था, बावजूद इसके न तो कोई रोकथाम हुई, न किसी के खिलाफ कार्यवाही
स्थानीय नागरिकों में भारी आक्रोश है। उनका कहना है कि जब मुख्यमंत्री का कार्यक्रम और धार्मिक आयोजन दोनों साथ-साथ हों, तब इस तरह की आपराधिक गतिविधि प्रशासन की नैतिक और कानूनी विफलता को उजागर करती है।
लैलूंगा थाना की भूमिका पर अब बड़ा सवाल उठ गया है —
क्या यह चुप्पी डर की है या साझेदारी की?
क्या मंदिर के नाम पर आस्था जुटाने वाले अधिकारी अब जुए की फड़ पर आंखें मूंद लेंगे?
ग्रामीणों ने इस पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच की मांग करते हुए कहा है कि दोषी पुलिस कर्मियों और जुआ संचालकों के खिलाफ कड़ी कार्यवाही होनी चाहिए, ताकि भविष्य में धार्मिक आयोजनों की आड़ में इस तरह की शर्मनाक घटनाएं दोहराई न जा सकें।
फिलहाल लैलूंगा की जनता आक्रोशित और सवाल पूछ रही है —
“मुख्यमंत्री के कदमों के नीचे बना मंदिर तो पवित्र हुआ,
पर उसी भूमि पर पुलिस की मौजूदगी में जुआ फड़ —
क्या यही प्रशासन का नया संस्कार है?”
अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस जुआ प्रकरण पर चुप्पी साधता है या कार्यवाही करता है। जनता की निगाहें लैलूंगा थाने और जिला मुख्यालय दोनों पर टिकी हैं।
धर्मस्थल से दूरी पर अधर्म का खेल — लैलूंगा में कानून का मखौल!”
