
ज्ञान की ज्योति जो बुझी नहीं — झगरपुर में चमका “गायत्री ज्ञान मंदिर” का यज्ञ स्टाल
लैलूंगा/झगरपुर — जब समाज में अंधकार गहराता है, तब कोई एक दीपक ही रोशनी का मार्ग दिखाता है। ऐसा ही दीपक 1970 में स्वर्गीय ओमप्रकाश मित्तल ने प्रज्वलित किया था — गायत्री ज्ञान मंदिर के रूप में। तब से लेकर आज तक, यह ज्ञान यज्ञ निरंतर जल रहा है — बिना रुके, बिना थके, सतत् समाज को दिशा देता हुआ।
झगरपुर में आयोजित श्री श्री रामचंडी मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव में इस बार “गायत्री ज्ञान मंदिर” का ज्ञान यज्ञ स्टाल आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ यहां ज्ञानग्रंथों, आध्यात्मिक पुस्तकों और नैतिकता आधारित साहित्य को पढ़ने व खरीदने के लिए उमड़ पड़ी। स्टाल पर “वेद का सार”, “गायत्री मंत्र का विज्ञान”, “जीवन साधना के रहस्य” जैसी पुस्तकें लोगों को आध्यात्मिक ऊर्जा और मानसिक शांति का संदेश दे रही हैं।
गायत्री परिवार के सदस्यों ने बताया कि स्वर्गीय ओमप्रकाश मित्तल का यह मिशन केवल किताब बेचने का नहीं, बल्कि ज्ञान बाँटने का अभियान है — ऐसा अभियान जो मनुष्य को मनुष्यता से जोड़ता है, और जीवन में सकारात्मकता का संचार करता है।
स्टाल पर पहुंचे श्रद्धालुओं ने कहा कि आज जब दुनिया मोबाइल और सोशल मीडिया की चमक में उलझी है, तब गायत्री ज्ञान मंदिर जैसे केंद्र ही “जीवन का असली अर्थ” समझाने का कार्य कर रहे हैं।
इस अवसर पर गायत्री परिवार के वरिष्ठ सदस्यों ने ओमप्रकाश मित्तल के योगदान को याद करते हुए कहा —
वो व्यक्ति चला गया, पर उसका ज्ञान आज भी समाज को रोशन कर रहा है।”
रामचंडी मंदिर परिसर में गूंज रहे मंत्रोच्चारण के बीच जब श्रद्धालु इस स्टाल से पुस्तक लेकर जाते हैं, तो उनके साथ केवल किताब नहीं — बल्कि ज्ञान, प्रेरणा और प्रकाश भी घर जाता है।
झगरपुर में इस बार सिर्फ प्राण प्रतिष्ठा नहीं हुई, बल्कि ज्ञान की भी प्रतिष्ठा हुई — और वो भी गायत्री ज्ञान मंदिर के अमर दीप से।
